प्रयागराज: मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से संबद्ध स्वरूप रानी नेहरू (SRN) अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बार फिर अपनी बेहतरीन चिकित्सा तकनीक और अनुभव का लोहा मनवाया है। अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और हैरान कर देने वाले मामले में 25 वर्षीय युवती के गर्भाशय (बच्चेदानी) का सफल ऑपरेशन किया है। डॉक्टरों की टीम ने अत्यंत सावधानीपूर्वक सर्जरी करते हुए युवती के गर्भाशय से एक-दो नहीं बल्कि पूरी 13 गांठें (मायोमा) बाहर निकाली हैं।
इस बेहद मुश्किल ऑपरेशन की सबसे बड़ी और राहत की बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में गांठें होने के बावजूद डॉक्टरों ने युवती के गर्भाशय को पूरी तरह सुरक्षित बचा लिया है, जिससे उसका भविष्य में मां बनने का सपना सुरक्षित रहा। सफल ऑपरेशन के बाद मरीज को नई जिंदगी मिली है और उसकी हालत में तेजी से सुधार हो रहा है।
महीनों से असहनीय दर्द और पेट के भारीपन से जूझ रही थी युवती
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 25 वर्षीय पीड़ित युवती पिछले कई महीनों से पेट में अत्यधिक भारीपन, सूजन और असहनीय तेज दर्द की समस्या से गंभीर रूप से पीड़ित थी। इस बीमारी के कारण उसका सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो चुका था। कई जगहों पर डॉक्टरों को दिखाने और जांच कराने के बाद उसे एसआरएन (SRN) अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग ओपीडी (Gynecology OPD) में लाया गया।
यहाँ जब डॉक्टरों ने मरीज की गहन शारीरिक जांच और अल्ट्रासाउंड सहित अन्य आवश्यक टेस्ट करवाए, तो रिपोर्ट देखकर खुद डॉक्टर भी हैरान रह गए। युवती के गर्भाशय में छोटी-बड़ी कई गांठें बन चुकी थीं, जो आपस में इस कदर उलझी हुई थीं कि मामूली सी लापरवाही से गर्भाशय को गंभीर नुकसान पहुंच सकता था। मरीज की कम उम्र को देखते हुए डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती गांठों को निकालने के साथ-साथ बच्चेदानी को सुरक्षित रखने की थी।
डॉ. शक्ति जैन और उनकी टीम ने किया जटिल मायोमेक्टोमी ऑपरेशन
मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. शक्ति जैन और उनकी कुशल टीम ने इस चुनौती को स्वीकार किया। डॉक्टरों ने इस जटिल ऑपरेशन के लिए 'मायोमेक्टोमी' (Myomectomy) तकनीक को चुना, जिसके तहत केवल गर्भाशय की गांठों को निकाला जाता है और बच्चेदानी को कोई नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाता।
यह ऑपरेशन बेहद पेचीदा था क्योंकि गांठों की संख्या 13 थी और वे गर्भाशय की दीवारों से पूरी तरह चिपकी हुई थीं। जरा सी भी चूक होने पर भारी रक्तस्राव (Bleeding) का खतरा था, जिससे मरीज की जान जोखिम में पड़ सकती थी। लेकिन डॉ. शक्ति जैन की टीम ने अपनी विशेषज्ञता और सूझबूझ का परिचय देते हुए घंटों चली इस मैराथन सर्जरी को पूरी तरह सफल बनाया। ऑपरेशन के बाद जब एक-एक कर सभी 13 गांठें बाहर निकाली गईं, तो डॉक्टरों के साथ-साथ परिजनों ने भी राहत की सांस ली।
चिकित्सा जगत की बड़ी उपलब्धि, मरीज की स्थिति में सुधार
एसआरएन अस्पताल में हुआ यह सफल ऑपरेशन चिकित्सा जगत और विशेष रूप से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रही है। इस प्रकार के जटिल ऑपरेशन आमतौर पर निजी अस्पतालों में बेहद खर्चीले होते हैं, लेकिन सरकारी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने इसे सुगमता से अंजाम देकर गरीब मरीजों के लिए एक मिसाल पेश की है।
सफल सर्जरी के बाद मरीज को डॉक्टरों की विशेष निगरानी में वॉर्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। परिजनों ने डॉक्टरों की इस टीम को कोटि-कोटि धन्यवाद देते हुए उन्हें भगवान का रूप बताया है, जिन्होंने उनकी बेटी को एक नया और स्वस्थ जीवन प्रदान किया है।

