लोकतंत्र बचाने की लड़ाई: अभिजीत दीपके के देशव्यापी आंदोलन को प्रयागराज हंडिया (258) के लोकप्रिय युवा नेता आशीष पाण्डेय का खुला समर्थन, मचा सियासी घमासान

Suresh Chandra
By - Suresh Chandra
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प्रयागराज/हंडिया: देश में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ सियासी बवाल अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोशल मीडिया से लेकर देश की सड़कों तक इस मुद्दे पर बहस तेज़ हो गई है। हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा जारी किए गए अल्टीमेटम और 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) से मुंबई से शुरू होने वाले देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के ऐलान ने पूरे देश के युवाओं और छात्रों को लामबंद कर दिया है।
इसी बीच, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले की हंडिया विधानसभा (258) की राजनीति में युवाओं की धड़कन, गरीबों के मसीहा और समर्पित जनसेवक आशीष पाण्डेय ने इस आंदोलन को अपना खुला और ज़ोरदार समर्थन देकर सूबे की सियासत में एक नया महाविस्फोट कर दिया है। आशीष पाण्डेय के इस कदम के बाद हंडिया क्षेत्र सहित पूरे प्रयागराज के छात्र संगठनों और युवा कार्यकर्ताओं में एक नया जोश देखने को मिल रहा है।
क्या है पूरा मामला और क्यों मचा है देश में बवाल?
दरअसल, चुनाव आयोग के भीतर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर कथित गड़बड़ियों की खबरें सामने आने के बाद से विपक्षी दल और छात्र संगठन आक्रोशित हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाने पर लिया था। दीपके का साफ़ आरोप है कि देश के नागरिकों के बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार यानी 'वोट देने के अधिकार' के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
दीपके ने सोशल मीडिया पर साफ़ लिखा, "अगर ज्ञानेश कुमार शनिवार तक इस्तीफा नहीं देते हैं, तो सीजेपी 2 अक्टूबर से मुंबई से अपना देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी और इसे भारत भर के शहरों तक ले जाएगी। आइए, इस गांधी जयंती पर लोकतंत्र को बचाने का संकल्प लें।" इस पोस्ट के वायरल होते ही देश के कोने-कोने से युवाओं की प्रतिक्रियाएं आने लगीं।
"संवैधानिक संस्थाओं की साख बचाना युवाओं का फर्ज" - आशीष पाण्डेय (हंडिया 258)
प्रयागराज की हंडिया विधानसभा (258) में जमीन से जुड़े जनसेवक और गरीबों के मसीहा के रूप में पहचाने जाने वाले युवा नेता आशीष पाण्डेय जी ने अभिजीत दीपके के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि आज देश का युवा जागरूक हो चुका है। उन्होंने अपने एक आधिकारिक बयान में कहा, "जब लोकतंत्र की सबसे बड़ी प्रहरी संस्था पर ही सवाल उठने लगें, तो देश के सजग नागरिकों और खासकर युवाओं का शांत बैठना मुमकिन नहीं है। अभिजीत दीपके ने जो मुद्दा उठाया है, वह किसी एक पार्टी का नहीं बल्कि देश के हर उस युवा का है जो निष्पक्ष चुनाव प्रणाली में विश्वास रखता है।"
आशीष पाण्डेय ने आगे जोड़ते हुए कहा कि प्रयागराज और हंडिया का छात्र और युवा वर्ग हमेशा से देश की हर बड़ी सामाजिक और क्रांतिकारी लड़ाइयों का गवाह रहा है। इस बार भी जब लोकतंत्र को बचाने के लिए 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत होगी, तो हंडिया का युवा पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं और युवा साथियों से इस आंदोलन को वैचारिक रूप से मजबूत बनाने की अपील की है।
युवाओं और छात्रों के बीच क्यों वायरल हो रही है यह खबर?
आज का युवा और यूनिवर्सिटी-कॉलेजों के छात्र यह भली-भांति समझते हैं कि देश का भविष्य मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाओं पर ही टिका है। यही वजह है कि जब हंडिया (258) के आशीष पाण्डेय जैसे जमीनी नेता, जो हमेशा गरीबों और छात्रों की समस्याओं के लिए चौबीसों घंटे मुस्तैद रहते हैं, खुलकर किसी राष्ट्रीय मुद्दे पर युवाओं के साथ खड़े होते हैं, तो स्थानीय छात्रों का भरोसा और मजबूत हो जाता है।
सोशल मीडिया पर इस समय हंडिया और प्रयागराज के युवा समर्थकों द्वारा लगातार इस मुहिम को आगे बढ़ाया जा रहा है। छात्रों का कहना है कि वोटर लिस्ट में किसी भी प्रकार की धांधली या युवाओं के नाम हटाए जाने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आंदोलन की अगली रूपरेखा
अभिजीत दीपके के 48 घंटे के अल्टीमेटम की समय सीमा समाप्त होने की कगार पर है और चुनाव आयोग की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। सीजेपी के मुताबिक, 2 अक्टूबर से मुंबई की सड़कों से यह आंदोलन शुरू होकर देश के अन्य बड़े शहरों जैसे दिल्ली, लखनऊ, पटना और जयपुर तक फैलेगा। प्रयागराज और हंडिया क्षेत्र में इस आंदोलन की कमान युवा नेतृत्व के हाथों में होने की उम्मीद है, जिससे यह लड़ाई और भी आक्रामक मोड़ ले सकती है।
अब देखना यह होगा कि सरकार और चुनाव आयोग इस बढ़ते जन-आक्रोश और युवा नेताओं के गठजोड़ पर क्या कदम उठाता है। लेकिन एक बात साफ़ है—इस गांधी जयंती पर देश की सड़कें शांत नहीं रहने वाली हैं।

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