प्रयागराज: हंडिया में तालाब में जहर डालने का आरोप, भारी मात्रा में मछलियां मरने से मचा हड़कंप, पीड़ित को लाखों का नुकसान

Sanvariya Times
By - Sanvariya Times
0

 

Handia Prayagraj fish pond poisoning incident
"प्रयागराज के हंडिया में पीड़ित जयराम बिंद के तालाब में मृत पाई गईं मछलियां। (सांकेतिक चित्र)"

  • घटना स्थल: ग्राम बरिया तारा, तहसील हंडिया, जनपद प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)।
  • मुख्य पीड़ित: स्थानीय मछली पालक जयराम बिंद।
  • आरोप: आपसी रंजिश के चलते पड़ोस के व्यक्ति द्वारा तालाब में जहरीला पदार्थ मिलाना।
  • नुकसान: करीब तीन महीने की मेहनत बर्बाद, क्विंटल के हिसाब से मछलियों की मौत।
  • पुलिसिया कार्रवाई: हंडिया थाने में लिखित शिकायत दर्ज, पुलिस जांच और सैंपल रिपोर्ट का इंतज़ार।
प्रयागराज (हंडिया)।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और अमानवीय मामला सामने आया है। हंडिया तहसील के अंतर्गत आने वाले बरिया तारा गांव में आपसी रंजिश और विवाद के चलते एक मछली पालक की महीनों की गाढ़ी कमाई और मेहनत को पल भर में राख कर दिया गया। यहाँ एक स्थानीय ग्रामीण ने अपने ही पड़ोसी पर तालाब में जहरीला पदार्थ मिलाकर उसकी लाखों रुपये की मछलियों को जानबूझकर मारने का एक गंभीर आरोप लगाया है। इस घटना के बाद से पूरे बरिया तारा गांव और आसपास के ग्रामीण इलाकों में हड़कंप का माहौल बना हुआ है। पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है, क्योंकि उनकी आजीविका का एकमात्र साधन यही मछली पालन का व्यवसाय था।
क्या है पूरा मामला? (The Complete Incident)
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बरिया तारा गांव के निवासी जयराम बिंद पिछले कई वर्षों से अपने निजी व पट्टे के तालाबों में मछली पालन का कार्य करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते आ रहे हैं। जयराम बिंद ने बताया कि उन्होंने करीब तीन महीने पहले काफी लागत लगाकर तालाब में मछली के उन्नत नस्ल के बच्चे (जीरा) डाले थे।
मछली पालन एक ऐसा व्यवसाय है जिसमें चौबीसों घंटे निगरानी और कड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है। जयराम और उनका परिवार दिन-रात तालाब की देखरेख में जुटा रहता था। सही खान-पान, नियमित दवाओं के छिड़काव और कड़ी मशक्कत के कारण मछलियां बहुत तेजी से बड़ी हो रही थीं। वर्तमान समय में तालाब की अधिकांश मछलियां लगभग एक-एक किलोग्राम के वजन तक पहुंच चुकी थीं। पीड़ित जयराम इस बात को लेकर बेहद खुश थे कि अगले कुछ ही दिनों में वे इन मछलियों को जाल डालकर तालाब से बाहर निकालेंगे और नजदीकी थोक मंडियों में बेचकर अपनी लागत और मुनाफा वसूल करेंगे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
पानी भरने को लेकर हुआ था विवाद, मिली थी गंभीर धमकी
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे आपसी रंजिश और पुरानी दुश्मनी की बात सामने आ रही है। पीड़ित जयराम बिंद के अनुसार, कुछ दिन पहले तालाब में पानी डालने और पाइपलाइन को लेकर उनके पड़ोसी के साथ तीखी बहस हुई थी। बात इतनी बढ़ गई थी कि दोनों पक्षों के बीच काफी गाली-गलौज और विवाद हुआ था।
जयराम का आरोप है कि उस विवाद के दौरान ही उनके पड़ोसी ने उन्हें सीधे तौर पर गंभीर परिणाम भुगतने और उनकी पूरी मेहनत को बर्बाद करने की खुली धमकी दी थी। उस समय जयराम ने इस धमकी को सामान्य कहासुनी समझकर नजरअंदाज कर दिया था, लेकिन उन्हें इस बात का कतई अंदाजा नहीं था कि आरोपी इतनी घिनौनी और क्रूर साजिश रच रहा है।
रात के अंधेरे में रची गई साजिश: सुबह तैरती मिलीं लाशें
आरोप है कि इसी आपसी विवाद का बदला लेने और रंजिश को भुनाने के लिए आरोपी ने रात के सन्नाटे का फायदा उठाया। जब पूरा गांव सो रहा था, तब कथित तौर पर आरोपी ने तालाब के किनारे पहुंचकर पानी में कोई बेहद खतरनाक और तीव्र असर करने वाला जहरीला कीटनाशक या पदार्थ मिला दिया।
अगले दिन सुबह जब जयराम बिंद हर रोज की तरह अपने तालाब पर मछलियों को चारा डालने पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। तालाब का पानी अजीब सा बदबूदार हो चुका था और सतह पर चांदी की तरह सफेद रंग की मृत मछलियां तैर रही थीं। एक-एक करके क्विंटल के हिसाब से मछलियां पानी के ऊपर आ गईं। जयराम ने चीख-पुकार मचाई, जिसे सुनकर उनके परिवार के लोग और आसपास के ग्रामीण भी भारी संख्या में मौके पर इकट्ठा हो गए। देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में बड़ी-बड़ी मृत मछलियों का अंबार तालाब के किनारे लग गया।
लाखों का आर्थिक नुकसान, रोजी-रोटी का संकट
इस दर्दनाक और साजिशी घटना के कारण मछली पालक जयराम बिंद को भारी वित्तीय आघात लगा है। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, मृत मछलियों की बाजार में कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है। इसके अतिरिक्त जो पैसा उन्होंने तीन महीने तक मछलियों के दाने, पानी के रख-रखाव और दवाओं पर खर्च किया था, वह भी पूरी तरह डूब गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जयराम ने इस बार मछली पालन के लिए स्थानीय साहूकारों या बैंक से कर्ज भी लिया था। अब जब मछलियां ही नहीं रहीं, तो वह इस कर्ज की भरपाई कैसे करेंगे और अपने परिवार का पेट कैसे पालेंगे, यह एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। गांव के अन्य लोगों ने भी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे एक गरीब किसान की कमर तोड़ने वाली हरकत बताया है।
हंडिया थाने में लिखित शिकायत, पुलिस जांच में जुटी
घटना से आक्रोशित और दुखी पीड़ित जयराम बिंद ने बिना समय गंवाए सीधे हंडिया पुलिस थाने का रुख किया। उन्होंने आरोपी पड़ोसी के खिलाफ नामजद लिखित तहरीर दी है, जिसमें जानबूझकर संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, धमकी देने और पशु क्रूरता के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग की गई है।
शिकायत मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन भी हरकत में आ गया है। हंडिया थाने के प्रभारी ने बताया कि पीड़ित की शिकायत को दर्ज कर लिया गया है और मामले की छानबीन शुरू कर दी गई है। हालांकि, पुलिस का यह भी कहना है कि चूंकि मामला तालाब में जहर डालने का है, इसलिए वैज्ञानिक साक्ष्यों के बिना किसी को सीधे दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
पुलिस की एक टीम ने मौके पर जाकर तालाब के दूषित पानी और मृत मछलियों के सैंपल एकत्र किए हैं। इन सैंपलों को प्रयोगशाला (लैब) में रासायनिक परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मछलियों की मौत पानी में किसी जहरीले रसायन के मिलने से हुई है या फिर अचानक ऑक्सीजन की कमी अथवा किसी संक्रामक बीमारी के फैलने के कारण यह हादसा हुआ। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि यदि जांच में जहर मिलाने की पुष्टि होती है, तो आरोपी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।
संपादकीय टिप्पणी (Sanvariya Times View):
मछली पालन और कृषि जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में इस तरह की रंजिश की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। एक गरीब किसान या कामगार महीनों की मेहनत से अपनी फसल या व्यवसाय को सींचता है। ऐसे में चंद रुपयों के विवाद के लिए किसी की पूरी आजीविका को नष्ट कर देना एक अक्षम्य अपराध है। हंडिया पुलिस को इस मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच करनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके और पीड़ित जयराम बिंद को न्याय के साथ-साथ उचित मुआवजा मिल सके।

Post a Comment

0 Comments

Post a Comment (0)
3/related/default