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| छह दिनों से ठप पड़ी जलापूर्ति के कारण खाली बर्तनों के साथ परेशान स्थानीय निवासी। (सांकेतिक चित्र) |
हनुमानगंज (प्रयागराज/बहादुरपुर): उत्तर प्रदेश के बहादुरपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले हनुमानगंज बाजार और उसके आस-पास के ग्रामीण इलाकों में इस समय पीने के पानी को लेकर भारी हाहाकार मचा हुआ है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, हनुमानगंज बाजार सहित इसके समीपवर्ती क्षेत्रों के करीब पांच हजार घरों में पिछले छह दिनों से नलों की टोटियां पूरी तरह सूखी पड़ी हैं। इस भीषण पेयजल संकट के कारण पूरे बाजार क्षेत्र और ग्रामीण इलाकों में हाहाकार मचा हुआ है, जिससे स्थानीय उपभोक्ताओं और ग्रामीणों में जल संस्थान तथा संबंधित विभाग के खिलाफ गहरा आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों ने इस पूरी समस्या के लिए विभागीय उदासीनता और तकनीकी लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि इस भीषण गर्मी और दैनिक आवश्यकताओं के दिनों में पानी जैसी मूलभूत सुविधा न मिलना उनके मानवाधिकारों और सामान्य जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन है।
कैसे शुरू हुआ यह पूरा संकट?
स्थानीय लोगों और उपभोक्ताओं से मिली जानकारी के अनुसार, इस गंभीर पेयजल संकट की शुरुआत लगभग छह दिन पहले हुई थी। सबसे पहले जलापूर्ति करने वाले पंप की विद्युत केबल अचानक जल गई थी, जिसके कारण पूरे क्षेत्र की पानी की सप्लाई ठप हो गई। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत तुरंत संबंधित विभाग के अधिकारियों से की। शिकायतों के लंबे दौर के बाद, करीब तीन दिन बीत जाने पर विभाग द्वारा केबल को दुरुस्त तो करा दिया गया, लेकिन ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि उसी रात ड्यूटी पर तैनात जलकर्मी की घोर लापरवाही के चलते पंप की मुख्य मोटर ही पूरी तरह फुंक (जल) गई।
केबल ठीक होने के तुरंत बाद मोटर जल जाने की इस घटना ने ग्रामीणों की मुश्किलों को कई गुना बढ़ा दिया है। इस तकनीकी खराबी के बाद से विभाग की ओर से अब तक मरम्मत कार्य को लेकर या नई मोटर लगाने के संबंध में कोई भी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। विभागीय अधिकारियों की इस चुप्पी और टालमटोल वाले रवैये के कारण स्थानीय जनता में असंतोष की भावना दिन-ब-दिन उग्र होती जा रही है।
एक वर्ष पूर्व जर्जर टंकी का ध्वस्त होना बनी मुख्य वजह
इस पेयजल संकट की जड़ें लगभग एक साल पुरानी व्यवस्था से जुड़ी हुई हैं। हनुमानगंज के पक्के तालाब के पास स्थित पेयजल समूह की एक पुरानी और जर्जर पानी की टंकी थी, जिसे सुरक्षा कारणों के मद्देनजर करीब एक वर्ष पूर्व विभाग द्वारा पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया था। उस जर्जर टंकी के ध्वस्त होने के बाद, हनुमानगंज बाजार, अप्सरा चौराहा, फतूहा, सराय लाहुरपुर और बीकापुर जैसे घने रिहायशी क्षेत्रों में सीधे नलकूप से (डायरेक्ट मोटर चालू करके) सुबह और शाम को दो-दो घंटे जलापूर्ति की व्यवस्था बनाई गई थी।
चूंकि पानी के भंडारण के लिए कोई वैकल्पिक टंकी मौजूद नहीं थी, इसलिए पूरी जलापूर्ति सीधे तौर पर पंप की मोटर पर निर्भर हो गई। ऐसे में मोटर खराब होते ही पूरी पांच हजार की आबादी के सामने पानी का कोई अन्य सरकारी जरिया नहीं बचा और लोग पूरी तरह निजी टैंकरों या दूर-दराज के हैंडपंपों पर निर्भर होने के लिए मजबूर हो गए हैं।
आक्रोशित ग्रामीणों ने दी सड़क पर उतरने की चेतावनी
इस गंभीर समस्या को लेकर क्षेत्र के प्रतिष्ठित नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने अपनी आवाज बुलंद की है। जिला पंचायत सदस्य भूपेंद्र सिंह पिंटू, भोला सिंह, शरद केसरवानी, संदीप केसरवानी, मदन मोदनवाल, बैजनाथ चौरसिया, धर्मेंद्र जायसवाल, शक्ति केसरवानी, जीतू सोनी, रमन मोदनवाल, सुरेश केसरवानी, झल्लर भारतीय और शंकर भारतीय सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने एक सुर में विभागीय लापरवाही की कड़ी निंदा की है।
आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि जलकल विभाग और संबंधित अवर अभियंता (जेई) की लापरवाही के कारण ही यह संकट इतना लंबा खिंचा है। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से जिलाधिकारी (डीएम) से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नलकूप की मोटर को ठीक नहीं कराया और जलापूर्ति बहाल नहीं की, तो वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सड़क पर उतरकर उग्र विरोध प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

