रामनगर रामलीला: तीसरे दिन गूंजा जनक-राम संवाद, ताड़का वध और अहिल्या उद्धार की लीला देख भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

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By - Sanvariya Times
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रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला के तीसरे दिन रविवार को कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक प्रसंगों का जीवंत मंचन किया गया, जिसे देखकर वहां मौजूद हजारों श्रद्धालु पूरी तरह भाव-विभोर हो उठे। वाराणसी के रामनगर में आयोजित होने वाली इस पारंपरिक रामलीला में श्रीराम और लक्ष्मण के वन गमन से लेकर जनकपुर आगमन और राजा जनक के साथ हुए संवाद तक की लीला को बहुत ही सजीव ढंग से प्रस्तुत किया गया। परंपरा के अनुसार, प्रभु श्रीराम और भाई लक्ष्मण ने पदयात्रा (पैदल चलकर) करते हुए इस लीला को आगे बढ़ाया, जिसे देखने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही।

दशरथ के दरबार पहुंचे विश्वामित्र, मांगे राम-लक्ष्मण
लीला की शुरुआत में दिखाया गया कि जब राक्षसों के बढ़ते आतंक और अत्याचार के कारण ऋषि-मुनियों के यज्ञ और तपस्या में लगातार बाधा उत्पन्न होने लगी, तब महर्षि विश्वामित्र विवश होकर अयोध्या नगरी पहुंचे। अयोध्या के राजा दशरथ ने महल में उनका भव्य स्वागत और सत्कार किया। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र ने राजा दशरथ से अपने यज्ञ की रक्षा करने के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को अपने साथ वन भेजने का विशेष आग्रह किया।
गुरु विश्वामित्र की यह बात सुनकर राजा दशरथ गहरे पुत्र मोह में डूब गए और उन्होंने श्रीराम को वन भेजने से साफ मना कर दिया। उन्होंने विश्वामित्र से कहा कि वे स्वयं अपनी पूरी सेना के साथ चलकर उनके यज्ञ की रक्षा करेंगे, लेकिन श्रीराम को नहीं भेज पाएंगे। राजा दशरथ को अत्यधिक व्याकुल और भावुक देखकर कुलगुरु वशिष्ठ ने उन्हें समझाया और महर्षि विश्वामित्र की महिमा के बारे में बताया। गुरु वशिष्ठ के समझाने के बाद राजा दशरथ का संकोच दूर हुआ और उन्होंने भारी मन से श्रीराम को विश्वामित्र के साथ वन जाने की अनुमति दे दी। पिता की आज्ञा पाकर श्रीराम के साथ उनके छोटे भाई लक्ष्मण भी वन की ओर निकल पड़े।


वन में ताड़का का अंत और मुनियों के यज्ञ की रक्षा
लीला के अगले दृश्य में दिखाया गया कि महर्षि विश्वामित्र के साथ वन में पहुंचे श्रीराम ने सबसे पहले वहां आतंक मचाने वाली राक्षसी ताड़का का वध किया। ताड़का के वध के बाद मुनियों को भयमुक्त करते हुए श्रीराम ने सुबाहु नामक राक्षस का भी अंत किया और मारीच को अपने बाण के वेग से बहुत दूर खदेड़ दिया। इस प्रकार उन्होंने वन में रहने वाले सभी ऋषि-मुनियों के यज्ञ और अनुष्ठानों को पूरी तरह सुरक्षित और संपन्न कराया।
इसके बाद रामलीला के मंच पर माता अहिल्या के उद्धार का बेहद मार्मिक प्रसंग प्रस्तुत किया गया। अहिल्या का उद्धार करने के बाद महर्षि विश्वामित्र, प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण को साथ लेकर मिथिला नगरी यानी जनकपुर की ओर आगे बढ़े।


राम के स्वरूप को देखकर भाव-विभोर हुए राजा जनक
जनकपुर पहुंचने पर जैसे ही मिथिला के राजा जनक की नजर प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण पर पड़ी, वे उनके अलौकिक और मनोहारी स्वरूप को देखकर पूरी तरह सुध-बुध खो बैठे और भाव-विभोर हो उठे। रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने राजा जनक की इस आंतरिक दशा का बहुत ही सुंदर और मार्मिक वर्णन किया है, जिसे इस चौपाई के माध्यम से समझा जा सकता है:
"मूरति मधुर मनोहर देखी। भयेउ विदेह विदेह बिसेखी॥"
श्रीराम के दर्शन करते ही विदेह (बिना देह के अभिमान वाले) राजा जनक वास्तव में पूरी तरह विदेह हो गए। दोनों राजकुमारों के अनुपम सौंदर्य को देखकर राजा जनक के मन में यह गहरी जिज्ञासा उत्पन्न हुई कि आखिर ये दोनों सुंदर बालक कौन हैं? क्या ये किसी मुनि कुल के आभूषण हैं, किसी प्रतापी राजवंश के गौरव हैं या फिर स्वयं साक्षात परम ब्रह्म का स्वरूप हैं, जो धरती पर अवतरित हुए हैं? राजा जनक की इस व्याकुलता और जिज्ञासा को शांत करते हुए महर्षि विश्वामित्र ने उन्हें प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण का पूरा परिचय दिया और उनके दिव्य स्वरूप की महिमा का वर्णन किया। इसके बाद जनकपुर की इस पावन यात्रा के दौरान महर्षि विश्वामित्र ने श्रीराम और लक्ष्मण को गंगा नदी के पृथ्वी पर अवतरित होने की पूरी कथा भी विस्तार से सुनाई। रामनगर की रामलीला में इस पूरे प्रसंग को बिल्कुल कथा क्रम के अनुसार ही बहुत ही सुंदर ढंग से भक्तों के सामने प्रस्तुत किया गया।
आरती के साथ संपन्न हुई तीसरे दिन की लीला
श्रीराम, महर्षि विश्वामित्र और राजा जनक के बीच हुए इस अद्भुत संवाद के बाद रामनगर की पारंपरिक रामलीला के तीसरे दिन के मंचन को विराम दिया गया। लीला की समाप्ति के बाद वहां की सनातन परंपरा के अनुसार प्रभु श्रीराम की भव्य आरती उतारी गई। यह पावन आरती वहां उपस्थित एक प्रतिष्ठित संत द्वारा संपन्न कराई गई, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने शामिल होकर पुण्य लाभ कमाया।
रामनगर की इस ऐतिहासिक रामलीला को लेकर स्थानीय लोगों और दूर-दराज से आने वाले रामभक्तों में लगातार उत्साह बढ़ता जा रहा है। तीसरे दिन की लीला की समाप्ति के बाद अब अगले दिन भक्तों को 'फुलवारी लीला' का बेहद सुंदर और मनमोहक प्रसंग देखने को मिलेगा। इस खास प्रसंग को लेकर श्रद्धालुओं में अभी से काफी उत्सुकता देखी जा रही है और हर बीतते दिन के साथ रामभक्तों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है।

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