प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से वन्यजीवों की आबादी वाले क्षेत्रों में घुसपैठ की एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। जिले की हंडिया तहसील के अंतर्गत आने वाले सैदाबाद ब्लॉक के ऊष्मापुर ग्राम सभा में एक खतरनाक जंगली जानवर (संभावित तेंदुआ) देखे जाने की सूचना से पूरे इलाके और आसपास के गांवों में भारी दहशत और खौफ का माहौल पैदा हो गया है। इस घटना की पुष्टि तब और पुख्ता हो गई जब गांव के ही एक हिस्से से पालतू मवेशी (बकरी) को उठाए जाने की बात सामने आई। घटना की भनक लगते ही पूरे गांव के लोग लाठी-डंडों से लैस हो गए हैं और वन विभाग की टीम ने भी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर मोर्चा संभाल लिया है।
ग्राम प्रधान के घर के पास देखा गया तेंदुआ
स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार, वन्यजीव को सबसे पहले ग्राम प्रधान के घर के समीप स्थित एक बड़े बगीचे में चहलकदमी करते हुए देखा गया। जैसे ही बगीचे के आसपास मौजूद कुछ लोगों की नजर उस पर पड़ी, उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि शोर सुनकर वह फुर्तीला जानवर पलक झपकते ही पास में ही फैले घने खेतों की तरफ भाग निकला। इसके कुछ ही देर बाद खबर आई कि गांव के ही एक ग्रामीण की बकरी अचानक गायब है और कयास लगाए जा रहे हैं कि तेंदुए ने उसे अपना शिकार बना लिया है। इस वारदात के बाद से गांव के बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में इस कदर डर बैठ गया है कि लोग शाम ढलने से पहले ही अपने घरों के दरवाजे बंद करने को मजबूर हो गए हैं।
बाजरे के खेतों में छिपे होने की आशंका, सर्च ऑपरेशन तेज
ऊष्मापुर के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि (प्रधान पति) धनंजय मौर्य ने इस घटनाक्रम को लेकर बताया कि तेंदुए की गतिविधियों और पैरों के निशान (पगमार्क) के आधार पर उसके बाजरे के घने और ऊंचे खेतों में छिपे होने की प्रबल आशंका है। बाजरे की फसल इस समय काफी बड़ी हो चुकी है, जिसके कारण उसमें किसी भी बड़े जानवर को दूर से देख पाना बेहद मुश्किल काम है। इसी भौगोलिक चुनौती को देखते हुए वन विभाग के अधिकारियों को तत्काल वायरलेस और फोन के माध्यम से मामले की सूचना दी गई।
सूचना प्राप्त होते ही वन विभाग की एक विशेष रेस्क्यू टीम भारी संख्या में आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के साथ ऊष्मापुर गांव पहुंच गई। वनकर्मियों ने स्थानीय पुलिस और ग्रामीणों के सहयोग से पूरे प्रभावित इलाके की घेराबंदी कर दी है। बाजरे के खेतों और बगीचे के चारों तरफ लगातार छानबीन (कांबिंग) की जा रही है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पहली प्राथमिकता जानवर की सही लोकेशन को ट्रेस करना है, ताकि बिना किसी जान-माल के नुकसान के उसे सुरक्षित पकड़ा जा सके।
पकड़ने के लिए लगाया जाएगा भारी-भरकम पिंजरा
वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने ऊष्मापुर के ग्रामीणों को ढांढस बंधाते हुए आश्वासन दिया है कि सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी। विभाग द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, तेंदुए को सुरक्षित रूप से कैद करने के लिए चिन्हित स्थान पर एक बड़ा पिंजरा लगाया जा रहा है। इस पिंजरे के अंदर तेंदुए को आकर्षित करने के लिए शिकार (जैसे बकरा या मुर्गा) के चारे की व्यवस्था की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि शाम और रात के समय वन्यजीवों की सक्रियता सबसे अधिक होती है, इसलिए वन विभाग के विशेष कर्मचारी और अधिकारी रात भर घटना स्थल के आसपास मुस्तैद रहकर लगातार निगरानी करेंगे। यदि आवश्यकता पड़ी तो लखनऊ या कानपुर से वन्यजीव विशेषज्ञों और थर्मल ड्रोन कैमरों की मदद भी ली जा सकती है, जिससे रात के अंधेरे में भी जानवर की थर्मल इमेजिंग की जा सके।
कानूनी व सुरक्षा के मोर्चे पर वन विभाग और पुलिस सतर्क
इस संवेदनशील मामले को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और वन विभाग ने पूरी तरह कानूनी और व्यावहारिक रूप से सुरक्षित कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। वन संरक्षण अधिनियम के कड़े नियमों के तहत जंगली जानवरों को किसी भी प्रकार का नुकसान पहुंचाना या उन पर हिंसक हमला करना एक गंभीर कानूनी अपराध है। यही कारण है कि वन विभाग की टीम ग्रामीणों को लगातार यह समझा रही है कि वे कानून को अपने हाथ में न लें और जानवर को घेरने या उसे लाठी-डंडों से चोट पहुंचाने की कोशिश बिल्कुल न करें। किसी भी हिंसक टकराव से बचने के लिए पुलिस बल को भी गांव के बाहरी हिस्सों में तैनात किया गया है ताकि व्यवस्था बनी रहे।
प्रशासन की ओर से ग्रामीणों के लिए जरूरी एडवाइजरी (अपील)
जब तक वन विभाग की रेस्क्यू टीम इस तेंदुए को सुरक्षित रूप से पकड़कर उसके प्राकृतिक आवास (जंगल) में वापस नहीं छोड़ देती, तब तक प्रशासन ने ऊष्मापुर सहित सैदाबाद ब्लॉक के तमाम नजदीकी गांवों के लोगों के लिए एक विशेष चेतावनी और गाइडलाइन जारी की है:
- अकेले बाहर जाने से बचें: खेतों, बगीचों, जंगलों या किसी भी सुनसान और अंधेरे इलाके में भूलकर भी अकेले न जाएं। यदि खेतों में काम के सिलसिले में जाना बहुत जरूरी हो, तो हमेशा 4-5 लोगों के समूह में लाठी-डंडे लेकर और शोर मचाते हुए ही जाएं。
- बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा: छोटे बच्चों और बुजुर्गों को घरों से बाहर अकेला न छोड़ें, खासकर सुबह के समय और सूरज डूबने के बाद उन्हें पूरी तरह घर के अंदर ही सुरक्षित रखें।
- मवेशियों की सुरक्षा: अपने पालतू पशुओं, जैसे गाय, भैंस, बकरी और मुर्गों को खुले स्थानों पर बांधने के बजाय पूरी तरह बंद और सुरक्षित बाड़ों में रखें, क्योंकि जंगली जानवर अक्सर आसान शिकार की तलाश में रिहाइशी इलाकों का रुख करते हैं।
- रात में रोशनी का प्रबंध: रात के समय घरों के बाहर और गलियों में पर्याप्त रोशनी (लाइट या मशाल) की व्यवस्था रखें। अंधेरे कोने वन्यजीवों के छिपने के सबसे मुफीद स्थान होते हैं।
- अफवाहों से बचें और तुरंत सूचना दें: सोशल मीडिया या आपसी बातचीत में बिना किसी पुख्ता प्रमाण के कोई भी अफवाह न फैलाएं। यदि गांव में कहीं भी कोई संदेहास्पद हरकत या जानवर के पगमार्क दिखाई दें, तो तुरंत वन विभाग के कंट्रोल रूम या स्थानीय पुलिस थाने को सूचित करें।
फिलहाल, ऊष्मापुर गांव में वन विभाग का तलाशी अभियान पूरी मुस्तैदी के साथ जारी है और ग्रामीणों की सांसें अटकी हुई हैं। प्रशासन का दावा है कि स्थिति पूरी तरह उनके नियंत्रण में है और जल्द ही तेंदुए को पिंजरे में कैद कर लिया जाएगा।

