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| आधुनिक घरेलू उपकरणों में सही तकनीकी सेटिंग्स अपनाकर बिजली की खपत को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। (सांकेतिक चित्र/File Photo) |
टेक डेस्क, सांवरिया टाइम्स:
बदलते मौसम और आधुनिक जीवनशैली के बीच आज हर घर का बजट बिजली के भारी-भरकम बिल के कारण बिगड़ रहा है। अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि बिल कम करने का एकमात्र तरीका सुख-सुविधाओं से समझौता करना या फिर बाजार से महंगे फाइव-स्टार (5-Star) उपकरण खरीद लाना है। लेकिन टेक्नोलॉजी और अप्लायंसेज के विशेषज्ञ कुछ अलग राय रखते हैं। तकनीक की दुनिया में कुछ ऐसे बेहद आसान और व्यावहारिक उपाय मौजूद हैं, जिन्हें अपनाकर आप बिना एक भी रुपया खर्च किए हर महीने अपने बिजली के बिल में 20 प्रतिशत तक की संभावित बचत कर सकते हैं। इसके लिए आपको केवल अपने घर में 24 घंटे चलने वाले दो सबसे मुख्य उपकरणों— फ्रिज और इन्वर्टर की सेटिंग्स में कुछ तकनीकी बदलाव करने होंगे।
बदलते मौसम और आधुनिक जीवनशैली के बीच आज हर घर का बजट बिजली के भारी-भरकम बिल के कारण बिगड़ रहा है। अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि बिल कम करने का एकमात्र तरीका सुख-सुविधाओं से समझौता करना या फिर बाजार से महंगे फाइव-स्टार (5-Star) उपकरण खरीद लाना है। लेकिन टेक्नोलॉजी और अप्लायंसेज के विशेषज्ञ कुछ अलग राय रखते हैं। तकनीक की दुनिया में कुछ ऐसे बेहद आसान और व्यावहारिक उपाय मौजूद हैं, जिन्हें अपनाकर आप बिना एक भी रुपया खर्च किए हर महीने अपने बिजली के बिल में 20 प्रतिशत तक की संभावित बचत कर सकते हैं। इसके लिए आपको केवल अपने घर में 24 घंटे चलने वाले दो सबसे मुख्य उपकरणों— फ्रिज और इन्वर्टर की सेटिंग्स में कुछ तकनीकी बदलाव करने होंगे।
1. फ्रिज की सही तापमान सेटिंग है सबसे जरूरी
घर में रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) ही एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो बिना रुके साल के 365 दिन चलता है। इसलिए इसकी सेटिंग्स में की गई मामूली लापरवाही भी मीटर की रफ्तार को दोगुना कर देती है।
- थर्मोस्टेट को मौसम के अनुसार बदलें: कई लोग फ्रिज की कूलिंग को हमेशा 'मैक्सिमम' पर सेट रखते हैं, जो बिजली की सबसे ज्यादा बर्बादी करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य दिनों या गर्मियों में फ्रिज का तापमान 2 से 4 डिग्री सेल्सियस के बीच रखना पूरी तरह पर्याप्त होता है। जैसे ही मौसम में थोड़ी ठंडक या नमी आए, इसकी कूलिंग सेटिंग (डायल या नॉब) को मीडियम या लो पर कर देना चाहिए।
- दीवार से दूरी और वेंटिलेशन: फ्रिज को कभी भी दीवार से बिल्कुल सटाकर या रसोई के किसी बंद कोने में न रखें। फ्रिज के पीछे लगे कंडेनसर कॉइल्स को अंदर की गर्मी बाहर फेंकने के लिए हवा की जरूरत होती है। यदि वेंटिलेशन के लिए जगह नहीं होगी, तो कंप्रेसर पर दबाव बढ़ेगा और वह ज्यादा बिजली खींचेगा। फ्रिज को हमेशा दीवार से कम से कम 6 इंच की दूरी पर रखें।
- दरवाजे की रबर (गैसकेट) और गर्म खाना: फ्रिज का दरवाजा बार-बार खोलने से अंदर की कूलिंग लीक होती है। इसके अलावा, उबलता हुआ दूध या बिल्कुल गर्म खाना सीधे फ्रिज में कभी न रखें। उसे पहले कमरे के तापमान पर सामान्य होने दें, अन्यथा फ्रिज को उस बढ़ी हुई गर्मी को शांत करने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा लगानी पड़ेगी।
2. इन्वर्टर की बैटरी और लोड पर रखें खास नजर
पावर कट के दौरान बैकअप देने वाला इन्वर्टर सामान्य दिनों में भी मेन ग्रिड से बिजली लेकर चार्ज होता रहता है। अगर आपका इन्वर्टर सिस्टम तकनीकी रूप से मेंटेन नहीं है, तो यह चुपचाप आपके बिजली बिल को बढ़ाता रहेगा।
- इलेक्ट्रोलाइट (पानी) का स्तर: लेड-एसिड बैटरियों में डिस्टिल्ड वॉटर (आसुत जल) का स्तर कम होने पर उसकी कार्यक्षमता घट जाती है। ऐसी स्थिति में बैटरी पूरी तरह चार्ज नहीं हो पाती और इन्वर्टर उसे चार्ज करने के लिए लगातार बिजली खींचता रहता है। महीने में एक बार वॉटर इंडिकेटर की जांच करें और निर्माता के निर्देशानुसार पानी जरूर डालें।
- ऑटो-कट और ट्रिकल चार्जिंग: पुराने या खराब हो चुके इन्वर्टर में बैटरी फुल चार्ज होने के बाद भी बिजली की सप्लाई रोकने वाला 'ऑटो-कट' सिस्टम काम करना बंद कर देता है। इससे बैटरी ओवर-चार्ज होती है और बिजली की खपत बढ़ती रहती है। यदि इन्वर्टर की चार्जिंग लाइट कभी बंद नहीं होती, तो तुरंत किसी योग्य तकनीशियन से इसकी जांच कराएं।
3. 'फैंटम लोड' और लाइटिंग टेक्नोलॉजी को समझें
टेक्नोलॉजी की भाषा में एक शब्द इस्तेमाल होता है जिसे 'फैंटम लोड' या 'वैम्पायर पावर' कहते हैं। जब हम टीवी, एसी या सेटअप बॉक्स को रिमोट से तो बंद कर देते हैं, लेकिन दीवार पर लगा मुख्य स्विच ऑन छोड़ देते हैं, तब भी ये उपकरण स्टैंडबाय मोड पर लगातार बिजली सोखते रहते हैं। काम खत्म होने के बाद मेन स्विच बंद करने की आदत डालें। इसके अलावा, घर में लगे पुराने इनकैंडेसेंट (पीली रोशनी वाले) बल्बों को तुरंत हटाकर एलईडी (LED) लाइट्स का इस्तेमाल करें, जो 85% तक कम बिजली खाती हैं।
निष्कर्ष: आदतें बदलेंगी बिल का गणित
डिजिटल दौर में स्मार्ट सेटिंग्स और ऊर्जा प्रबंधन को समझकर हम अपनी जेब और पर्यावरण दोनों को बचा सकते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि 20% तक की बचत एक संभावित तकनीकी आंकड़ा है। वास्तविक बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि आपके घर के उपकरण कितने पुराने हैं, उनकी स्टार रेटिंग क्या है और आपके स्थानीय क्षेत्र में बिजली की प्रति यूनिट दरें क्या हैं। इन छोटी-छोटी तकनीकी आदतों को अपनाकर आप निश्चित रूप से अपने मासिक बजट को बड़ी राहत दे सकते हैं।

