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| राहत सामग्री बांटते खान सर। (सांकेतिक चित्र/File Photo) |
पटना। बिहार में बाढ़ की विभीषिका के बीच इंसानियत और सेवा भाव की एक ऐसी अनूठी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे देश का दिल जीत लिया है। पटना के सुप्रसिद्ध शिक्षक और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर खान सर (Khan Sir) इन दिनों बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए किसी मसीहा से कम साबित नहीं हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो बेहद तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह न सिर्फ बड़ी-बड़ी गाड़ियों और पिकअप वाहनों के जरिए राहत सामग्री भेज रहे हैं, बल्कि खुद जमीन पर उतरकर अपने हाथों से बाढ़ पीड़ितों के लिए खाना पकाते नजर आ रहे हैं।
मुश्किल वक्त में जब बाढ़ के पानी ने हजारों गरीब परिवारों के घरों के चूल्हे बुझा दिए, तब खान सर ने खुद कमान संभाली और पीड़ितों के आंसुओं को पोछने के लिए 'अपनापन' और 'उम्मीद' की नई रसोई शुरू कर दी।
खुद संभाली रसोई: अनाथ और भूखे बच्चों को देख पिघला खान सर का दिल
वायरल वीडियो और ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, खान सर अपनी पूरी टीम के साथ बिहार के सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में डेरा डाले हुए हैं। जब उन्होंने पानी से घिरे गांवों में नन्हे बच्चों और बेसहारा परिवारों को दाने-दाने के लिए तरसते देखा, तो वे खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने किसी बड़े वीआईपी या सेलिब्रिटी की तरह सिर्फ दूर से निर्देश देने के बजाय, खुद जमीन पर बैठकर बड़े बर्तनों में खाना तैयार करवाया और पूरी पैकिंग की निगरानी की।
इसके बाद वे खाने के पैकेट, जरूरी दवाइयां, दूध और राशन सामग्री लेकर दर्जनों पिकअप वाहनों, नावों और ट्रैक्टरों के जरिए पानी में डूबे घरों तक पहुंचे। कई जगहों पर पानी इतना गहरा था कि वे खुद नाव के जरिए लोगों की छतों और ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए परिवारों तक पहुंचे और अपने हाथों से उन्हें भोजन कराया।
"मुश्किल वक्त में मदद सिर्फ सामान नहीं, अपनापन होती है" – सोशल मीडिया पर बंधी तारीफों के पुल
इंटरनेट पर लोग खान सर के इस जज्बे को सलाम कर रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि संकट की इस घड़ी में राहत सामग्री बांटना एक बात है, लेकिन खुद बाढ़ के गंदे पानी के बीच जाकर, लोगों के साथ बैठकर और बच्चों को गोद में लेकर सहलाना एक अलग ही स्तर की इंसानियत को दर्शाता है। सोशल मीडिया पर लोग भावुक होकर लिख रहे हैं— "जहाँ बाढ़ ने चूल्हे बुझा दिए… 💔 वहाँ खान सर ने अपने हाथों से उम्मीद पकाई। खुद खाना बनाया और उजाड़ हो चुके घरों तक पहुँचकर अपनापन बांटा।"
सरकारी सिस्टम और दावों पर जनता ने उठाए तीखे सवाल
खान सर के इस व्यापक और त्वरित राहत अभियान को देखकर स्थानीय जनता और नेटिजन्स अब बिहार सरकार और स्थानीय प्रशासन के दावों को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जो काम, व्यवस्था और भोजन का प्रबंध पूरी तरह से सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग को करना चाहिए था, वहां सरकारी अमला केवल कागजी दावों और हवाई दौरों तक सीमित नजर आ रहा है। बाढ़ प्रभावितों का कहना है कि जब करोड़ों का बजट रखने वाली सरकारें और उनके अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलने में कतराते हैं, तब खान सर जैसे आम लोग अपनी कमाई और पूरी टीम को झोंककर डूबते हुए परिवारों की जिंदगी बचा रहे हैं। जनता के इस आक्रोश के बीच अब संबंधित सरकारी विभागों पर जमीनी स्तर पर राहत शिविर और कम्युनिटी किचन बढ़ाने का भारी दबाव बन गया है।

