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| चिकित्सा क्षेत्र में कथित लापरवाही और प्रशासनिक नियमों की अनदेखी के बाद अस्पताल परिसर के बाहर जांच में जुटी पुलिस टीम। (सांकेतिक चित्र/File Photo) |
प्रयागराज / नवाबगंज:
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के अंतर्गत आने वाले नवाबगंज थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। क्षेत्र के जगदीशपुर भगौतीपुर-मंसूराबाद मार्ग पर स्थित आनंदम अस्पताल में इलाज के दौरान एक 44 वर्षीय महिला की कथित तौर पर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस दुखद घटना के बाद मृतका के परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और प्रबंधन पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने तथा धोखे से बड़ी रकम वसूलने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने मृतका के पति की तहरीर पर अस्पताल संचालक, डॉक्टरों और संबंधित स्टाफ के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधिक जांच शुरू कर दी है।
प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, यह पूरा मामला नवाबगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक ग्रामीण परिवार से जुड़ा हुआ है। मृतका की पहचान 44 वर्षीय किरन देवी के रूप में हुई है। मृतका के पति पारसनाथ यादव ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी को एक छोटी सी शारीरिक चोट के इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था, लेकिन डॉक्टरों की कथित अकर्मण्यता, गलत इलाज और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण उनकी जान चली गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, ताकि मौत के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।
कूल्हे की हड्डी टूटने के बाद बेहतर इलाज की उम्मीद में कराया था भर्ती
पीड़ित पति पारसनाथ यादव द्वारा पुलिस को दी गई लिखित तहरीर के मुताबिक, यह घटनाक्रम विगत 25 सितंबर को शुरू हुआ था। उस दिन घर में काम करने के दौरान अचानक पैर फिसल जाने के कारण किरन देवी गंभीर रूप से गिर पड़ी थीं, जिससे उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। ग्रामीण इलाके में प्राथमिक उपचार के बाद, परिजनों ने किसी अच्छे और सर्वसुविधा युक्त चिकित्सा केंद्र में इलाज कराने का फैसला किया। इसी उम्मीद के साथ उन्होंने किरन देवी को जगदीशपुर भगौतीपुर-मंसूराबाद स्थित आनंदम अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने जल्द ऑपरेशन कर उन्हें ठीक करने का आश्वासन दिया था।
आयुष्मान कार्ड के बावजूद नकद और यूपीआई से लाखों की वसूली का आरोप
इस पूरे मामले में एक बड़ा मोड़ तब आया जब पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रबंधन पर सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग और जबरन पैसे ऐंठने का संगीन आरोप लगाया। तहरीर में उल्लेख किया गया है कि मरीज के पास भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'आयुष्मान भारत कार्ड' मौजूद था, जिसके तहत मुफ्त इलाज का प्रावधान है।
आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने आयुष्मान कार्ड को भी सिस्टम में ऑनलाइन स्वीकार कर लिया, लेकिन इसके बावजूद इलाज, दवाओं और ऑपरेशन के नाम पर परिजनों से अतिरिक्त पैसों की मांग की गई। पीड़ित पारसनाथ के अनुसार, उन्होंने अस्पताल के दबाव में आकर डिजिटल माध्यम (UPI) से 20 हजार रुपये ट्रांसफर किए और इसके अलावा एक लाख 25 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि नकद (Cash) के रूप में काउंटर पर जमा की। परिवार का आरोप है कि इतनी बड़ी रकम वसूलने के बाद भी उनके मरीज को वह चिकित्सीय देखभाल नहीं मिली जिसकी उम्मीद की जा रही थी।
मरीज से मिलने पर रोक और अचानक मौत की सूचना से हड़कंप
मृतका के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने ऑपरेशन या विशेष उपचार का हवाला देकर 1 अक्टूबर से ही परिवार के किसी भी सदस्य को किरन देवी से मिलने की अनुमति नहीं दी। जब भी परिवार वाले अपनी मरीज की स्थिति जानना चाहते, तो स्टाफ द्वारा उन्हें वार्ड से बाहर कर दिया जाता या टालमटोल भरा जवाब दिया जाता था।
इसके बाद, 2 अक्टूबर को दोपहर करीब दो बजे अस्पताल के कर्मचारियों ने अचानक पारसनाथ यादव को सूचित किया कि किरन देवी की मौत हो चुकी है। इस खबर को सुनते ही परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। परिजनों का आरोप है कि जब उन्हें 1 अक्टूबर से मरीज से मिलने नहीं दिया गया, तो उन्हें यह गहरा संदेह है कि महिला की मौत पहले ही हो चुकी थी और अस्पताल प्रशासन अपनी कमियों को छिपाने के लिए समय टाल रहा था।
कानूनी पहलू और सुरक्षात्मक भाषा (Legal Compliance)
चूंकि यह मामला चिकित्सा जगत की कथित लापरवाही और आपराधिक मुकदमे से जुड़ा हुआ है, इसलिए वेबसाइट की कानूनी सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह स्पष्ट करना अत्यंत आवश्यक है कि पुलिस ने वर्तमान में पीड़ित पक्ष के आरोपों के आधार पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। कानून विशेषज्ञों के अनुसार, चिकित्सा से जुड़े मामलों में सीधे तौर पर किसी डॉक्टर को तब तक अंतिम रूप से दोषी नहीं ठहराया जा सकता जब तक कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) द्वारा गठित डॉक्टरों का एक पैनल या फॉरेंसिक टीम इलाज के पर्चों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की तकनीकी जांच पूरी न कर ले।
अस्पताल प्रबंधन या आरोपी डॉक्टरों की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे सभी बिंदुओं, जैसे वित्तीय लेनदेन के डिजिटल साक्ष्य, आयुष्मान कार्ड के रिकॉर्ड और मेडिकल हिस्ट्री की निष्पक्षता से जांच कर रहे हैं। कथित लापरवाही के आरोपों को फिलहाल पुलिस डायरी में जांच का मुख्य विषय बनाया गया है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़: अनाथ हुए पांच बच्चे
किरन देवी की इस असामयिक मौत ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है। 44 वर्षीय किरन देवी अपने पीछे पति पारसनाथ यादव के अलावा चार बेटियों और एक बेटे का भरा-पुरा परिवार छोड़ गई हैं। सबसे दुखद पहलू यह है कि इन पांचों बच्चों में से अभी तक किसी की भी शादी नहीं हुई है। सभी बच्चे अपनी पढ़ाई या जीवन के शुरुआती पड़ाव में हैं। मां का साया सिर से उठ जाने के बाद से घर में कोहराम मचा हुआ है और बच्चे बिलख रहे हैं। ग्रामीण और रिश्तेदार पीड़ित पिता को ढांढस बंधाने में जुटे हैं, लेकिन पूरे क्षेत्र में आनंदम अस्पताल के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
निष्कर्ष: स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर फिर उठे सवाल
नवाबगंज की इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की मनमानी, आयुष्मान योजना में कथित तौर पर होने वाले फर्जीवाड़े और ग्रामीण इलाकों में संचालित होने वाले क्लीनिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (प्रयागराज) से मांग की है कि ऐसे निजी अस्पतालों के खिलाफ एक व्यापक चेकिंग अभियान चलाया जाए ताकि किसी अन्य मासूम को अपनी जान न गंवानी पड़े। फिलहाल, नवाबगंज पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का इंतजार कर रही है, जिसके आधार पर आगे की विधिक और दंडात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।

