प्रयागराज: दरियाबाद में विकास प्राधिकरण की सील से छेड़छाड़ कर निर्माण का आरोप, नामजद प्राथमिकी और अग्रिम कार्रवाई की तैयारी
प्रयागराज / अतरसुइया:
संगम नगरी प्रयागराज के अतरसुइया थाना क्षेत्र अंतर्गत दरियाबाद मोहल्ले से एक जमीनी विवाद और सरकारी आदेशों के उल्लंघन का गंभीर मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यहाँ पांडेय चौराहे के समीप प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) द्वारा पूर्व में सील किए गए एक स्थल पर कथित रूप से सील हटाकर पुनः निर्माण कार्य शुरू करने का आरोप लगा है। इस मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से उच्चाधिकारियों से शिकायत किए जाने के बाद अब विकास प्राधिकरण के स्तर पर नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने और संबंधित अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण की वैधानिक कार्रवाई अमल में लाने की तैयारी की जा रही है।
संगम नगरी प्रयागराज के अतरसुइया थाना क्षेत्र अंतर्गत दरियाबाद मोहल्ले से एक जमीनी विवाद और सरकारी आदेशों के उल्लंघन का गंभीर मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यहाँ पांडेय चौराहे के समीप प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) द्वारा पूर्व में सील किए गए एक स्थल पर कथित रूप से सील हटाकर पुनः निर्माण कार्य शुरू करने का आरोप लगा है। इस मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से उच्चाधिकारियों से शिकायत किए जाने के बाद अब विकास प्राधिकरण के स्तर पर नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने और संबंधित अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण की वैधानिक कार्रवाई अमल में लाने की तैयारी की जा रही है।
क्या है पूरा भूखंड विवाद?
प्रकरण के संदर्भ में मिली जानकारी के मुताबिक, दरभंगा कॉलोनी की निवासी सुशीला देवी (पत्नी वी.के. द्विवेदी) ने वर्ष 2013 में दरियाबाद क्षेत्र में करीब 500 वर्ग गज का एक भूखंड क्रय किया था। खरीदारी के बाद उन्होंने उक्त भूमि पर बाउंड्रीवाल का निर्माण कराकर अपना कब्जा प्राप्त किया था। पीड़िता का आरोप है कि पिछले लगभग चार महीनों से स्थानीय निवासी कामरान, मोहम्मद सादमान और अस्मद आरा द्वारा इस भूखंड पर कथित रूप से हस्तक्षेप करने और अवैध निर्माण का प्रयास किया जा रहा है।
सील की कार्रवाई के बाद भी निर्माण का आरोप
इस विवाद को लेकर मामला सक्षम प्राधिकारी और न्यायालय के समक्ष भी पहुँचा, जहाँ से निर्माण कार्य पर स्थगन आदेश (Stay Order) जारी किया गया था। पीड़ित पक्ष का कहना है कि स्थगन आदेश के बावजूद जब दूसरे पक्ष द्वारा निर्माण कार्य नहीं रोका गया और वहाँ लिंटर डालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, तब मामले में प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने हस्तक्षेप किया। PDA के जोनल अधिकारी सूरज पटेल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बीती 28 सितंबर को उक्त निर्माणाधीन स्थल को आधिकारिक रूप से सील कर दिया था। आरोप है कि इस प्रशासनिक कार्रवाई के महज़ कुछ ही दिनों बाद विभाग की सील के साथ छेड़छाड़ कर वहाँ दोबारा काम शुरू करा दिया गया।
सोशल मीडिया और उच्चाधिकारियों से शिकायत के बाद एक्शन
सरकारी सील से छेड़छाड़ और अवैध निर्माण की भनक लगते ही पीड़ित पक्ष ने तुरंत इसकी शिकायत प्रयागराज विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ऋषिराज से की। इसके साथ ही मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय को भी पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया। डिजिटल माध्यम से शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुँचते ही प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई।
शिकायत का संज्ञान लेते हुए विकास प्राधिकरण के अधिकारी और प्रवर्तन दल की टीम तुरंत मौके पर पहुँची और चल रहे काम को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया।
अतरसुइया थाने में FIR और ध्वस्तीकरण की तैयारी
विकास प्राधिकरण के सूत्रों के अनुसार, सरकारी सील को तोड़ना या उससे छेड़छाड़ करना एक गंभीर कानूनी अपराध है। इसलिए विभाग अब इस मामले को लेकर बेहद सख्त रुख अपना रहा है। संबंधित जोनल अधिकारी के निर्देश पर अतरसुइया थाने में आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराने की विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही, प्राधिकरण के नियमों का उल्लंघन करके बनाए गए इस अवैध ढांचे को ढहाने (ध्वस्तीकरण) के लिए भी नोटिस और प्रशासनिक रूपरेखा तैयार की जा रही है। पुलिस और प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था और सरकारी आदेशों की अवहेलना करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

