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| प्रयागराज के समोधीपुर मेले की भव्य झांकियां |
प्रयागराज / उतरांव:
आस्था, परंपरा और आधुनिक उत्साह का एक ऐसा अनूठा संगम प्रयागराज के समोधीपुर में देखने को मिला, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय और ऊर्जावान बना दिया। समोधीपुर स्थित ऐतिहासिक राम-जानकी मंदिर परिसर में इस वर्ष भी वार्षिक भव्य मेले का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम और माता जानकी के चरणों में शीश नवाने और इस पारंपरिक उत्सव का गवाह बनने के लिए समोधीपुर सहित आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं और दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दोपहर से शुरू हुआ यह जनसैलाब देर रात तक मेले के रंग में रंगा रहा, जिससे पूरा इलाका उत्सव के माहौल में सराबोर नजर आया।
आस्था, परंपरा और आधुनिक उत्साह का एक ऐसा अनूठा संगम प्रयागराज के समोधीपुर में देखने को मिला, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय और ऊर्जावान बना दिया। समोधीपुर स्थित ऐतिहासिक राम-जानकी मंदिर परिसर में इस वर्ष भी वार्षिक भव्य मेले का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम और माता जानकी के चरणों में शीश नवाने और इस पारंपरिक उत्सव का गवाह बनने के लिए समोधीपुर सहित आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं और दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दोपहर से शुरू हुआ यह जनसैलाब देर रात तक मेले के रंग में रंगा रहा, जिससे पूरा इलाका उत्सव के माहौल में सराबोर नजर आया।
श्रद्धा और आस्था का केंद्र: राम-जानकी मंदिर
समोधीपुर का राम-जानकी मंदिर क्षेत्र के लोगों के लिए केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि अगाध आस्था और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। हर वर्ष की तरह इस बार भी मेले को लेकर कई दिनों पहले से तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी लाइटों, भव्य फूलों और आकर्षक तोरण द्वारों से दुल्हन की तरह सजाया गया था। सुबह से ही मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, महाआरती और अखंड रामायण पाठ का दौर चलता रहा। जैसे-जैसे सूरज ढलने लगा, वैसे-वैसे मंदिर प्रांगण और मेला क्षेत्र में पैर रखने तक की जगह नहीं बची। बुजुर्ग, महिलाएं, युवा और बच्चे—हर वर्ग के लोग नए वस्त्रों में सज-धजकर इस पावन उत्सव का हिस्सा बनने पहुंचे।
दिव्य झांकियों ने मोहा मन, साक्षात उतरे देवी-देवता
इस वर्ष के मेले का सबसे मुख्य और आध्यात्मिक आकर्षण यहाँ निकाली गई जीवंत और दिव्य झांकियां रहीं। मेला समिति द्वारा तैयार की गई भगवान राधा-कृष्ण की रासलीला, देवों के देव महादेव और माता पार्वती की अलौकिक जोड़ी, तथा दुष्टों का संहार करने वाली मां काली की रौद्र व आकर्षक झांकियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन झांकियों की बनावट, प्रकाश व्यवस्था और कलाकारों के जीवंत अभिनय ने ऐसा समां बांधा कि लोग भाव-विभोर होकर जयकारे लगाने लगे। पूरा मेला परिसर "जय श्री राम" और "हर हर महादेव" के गगनभेदी नारों से गुंजायमान हो उठा। लोग इन झांकियों के साथ सेल्फी लेने और इस पल को अपने कैमरों में कैद करने के लिए आतुर दिखे।
डीजे कॉम्पिटिशन और जवाबी बिरहा: आधुनिकता और लोक कला का महासंगम
इस बार के मेले को जिस चीज़ ने सबसे ज्यादा धमाकेदार और ऊर्ध्वगामी बनाया, वह था यहाँ आयोजित किया गया विशाल डीजे कॉम्पिटिशन (DJ Competition)। क्षेत्र के नामी और बड़े-बड़े डीजे संचालकों ने अपनी अत्याधुनिक साउंड प्रणालियों और लाइटिंग सिस्टम के साथ इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। जब डीजे की गूंजती थापों पर भक्ति गीतों और लोक धुनों का मिश्रण बजा, तो युवाओं की टोली खुद को थिरकने से नहीं रोक पाई। मीलों दूर तक डीजे की धमक सुनाई दे रही थी, जिसने मेले की ऊर्जा को कई गुना बढ़ा दिया।
आधुनिक डीजे के साथ-साथ हमारी माटी की पारंपरिक संस्कृति को जीवंत रखने के लिए जवाबी बिरहा और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी भव्य मंच सजाया गया था। उत्तर प्रदेश की लोक कला के धुरंधर बिरहा गायकों ने जब समसामयिक और पौराणिक मुद्दों पर अपने जवाबी वार-पलटवार शुरू किए, तो पांडाल में बैठे हजारों बुजुर्गों और कलाप्रेमियों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का हौसला बढ़ाया। देर रात तक चले इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मेले में चार चांद लगा दिए और लोगों को अंत तक बांधे रखा।
एक किलोमीटर का दायरा: बच्चों के खिलौने से लेकर चाट-पकौड़े की धूम
समोधीपुर का यह मेला करीब एक किलोमीटर से अधिक के विस्तृत दायरे में फैला हुआ था। मेले के रास्ते के दोनों किनारों पर सजी दुकानें इसकी भव्यता को बयां कर रही थीं। बच्चों के लिए तरह-तरह के झूले, मिकी माउस, खिलौनों की दुकानें और गुब्बारे वाले विशेष आकर्षण का केंद्र थे। वहीं, महिलाओं के लिए श्रृंगार सामग्री, घरेलू बर्तन और सजावटी सामानों की दुकानों पर भारी भीड़ देखी गई। मेले की जान कहे जाने वाले खान-पान के स्टॉलों पर भी जमकर चाट, गोलगप्पे, गर्मागर्म जलेबियाँ और समोसों का लुत्फ लोगों ने उठाया। ग्रामीणों के लिए यह मेला न केवल मनोरंजन का साधन था, बल्कि आपसी मिलन और सामाजिक समरसता का एक बड़ा जरिया साबित हुआ।
उतरांव पुलिस की मुस्तैदी: सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम
हजारों की भारी भीड़ और डीजे कॉम्पिटिशन के चलते कानून-व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखना एक बड़ी चुनौती थी। इसके मद्देनजर उतरांव थाना पुलिस प्रशासन पहले से ही पूरी तरह मुस्तैद और अलर्ट नजर आया। उतरांव पुलिस बल के जवानों और मेला समिति के वॉलिंटियर्स ने पूरे मेला क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर पैनी नजर रखी।
भीड़ को नियंत्रित करने, वाहनों की पार्किंग व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने और महिलाओं की सुरक्षा के लिए सादे कपड़ों में भी पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। पुलिस प्रशासन की इस सजगता और स्थानीय जनता के सहयोग के चलते इतनी बड़ी संख्या में उमड़ी भीड़ के बावजूद पूरा मेला अत्यंत शांतिपूर्ण, अनुशासित और सौहार्दपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। मेला संपन्न होने के बाद मेला समिति और क्षेत्र के संभ्रांत नागरिकों ने उतरांव पुलिस और प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
निष्कर्ष: परंपरा और एकता का संदेश
समोधीपुर का राम-जानकी मंदिर मेला इस बात का जीवंत उदाहरण है कि ग्रामीण भारत में आज भी हमारी लोक संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक ताना-बाना कितना मजबूत है। आधुनिकता की चकाचौंध के बीच पारंपरिक विधाओं जैसे बिरहा और झांकियों को डीजे कॉम्पिटिशन के साथ जोड़कर जिस तरह इस उत्सव को मनाया गया, उसने युवाओं और बुजुर्गों दोनों को एक मंच पर ला खड़ा किया। मेले की अपार सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि समोधीपुर का यह ऐतिहासिक आयोजन आने वाले वर्षों में और भी भव्य रूप अख्तियार करेगा।

