प्रयागराज: ऑपरेशन के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत, हाईवे पर दो किमी लंबा जाम; पीड़ित पति बोला- 'हंसते हुए अस्पताल आई थी पत्नी

(Sanvariya Times)
✍️ By: Suresh Chandra
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प्रसव के दौरान कथित लापरवाही का शिकार हुई मृतका वंदना देवी (फाइल फोटो)


उतरांव/प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में गंगापार के उतरांव थाना क्षेत्र से चिकित्सा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। यहाँ गंगापार इलाके में स्थित डॉ. पाठक मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में प्रसव के दौरान एक महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत के बाद क्षेत्र में भारी बवाल हो गया। घटना से आक्रोशित पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने डॉक्टरों पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने और अलग-अलग चरणों में रुपयों की अवैध वसूली करने का आरोप लगाया है। न्याय की मांग को लेकर परिजनों ने मृतका के शव के साथ प्रयागराज-गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन के दौरान परिवार की कई महिलाएं सड़क पर ही लेट गईं, जिसके कारण हाईवे पर करीब दो किलोमीटर लंबा भीषण जाम लग गया।
हंसते हुए अस्पताल आई थी वंदना, ऑपरेशन के बाद बिगड़ी बात
प्राप्त विवरण के अनुसार, उतरांव थाना क्षेत्र के आरा कला गांव के निवासी विपिन कुमार ने अपनी 24 वर्षीय पत्नी वंदना देवी को प्रसव के लिए बीते 29 सितंबर की दोपहर को डॉ. पाठक मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया था। वंदना के पति विपिन कुमार ने रुंधे गले से बताया कि उसकी पत्नी पूरी तरह स्वस्थ थी और हंसते हुए अपने पैरों पर चलकर अस्पताल आई थी। शुरुआत में अस्पताल के डॉक्टरों ने परिजनों को भरोसा दिलाया था कि सब कुछ सामान्य है और नॉर्मल डिलीवरी कराई जाएगी।
परंतु, कुछ समय बीतने के बाद डॉक्टरों ने अचानक यू-टर्न ले लिया। उन्होंने परिजनों को बताया कि महिला की हालत बेहद गंभीर (इमरजेंसी) है और जच्चा-बच्चा की जान बचाने के लिए तुरंत सिजेरियन ऑपरेशन करना पड़ेगा। डॉक्टरों के डराने पर घबराए परिजनों ने तुरंत ऑपरेशन के लिए अपनी सहमति दे दी।
बच्चे की मौत के बाद बच्चेदानी निकालने का दबाव और दोबारा ऑपरेशन
परिजनों के अनुसार, 30 सितंबर की सुबह करीब नौ बजे वंदना को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। पहले ऑपरेशन के कुछ देर बाद डॉक्टरों ने बताया कि नवजात बच्चे की मौत हो चुका है। इस खबर से परिवार टूट गया, लेकिन डॉक्टरों ने दावा किया कि वंदना पूरी तरह ठीक है। इसके बाद अचानक डॉक्टरों ने कहा कि महिला को अत्यधिक ब्लीडिंग (रक्तस्राव) हो रहा है, जिसे रोकने के लिए दोबारा ऑपरेशन करना होगा। परिजनों का आरोप है कि इस दौरान डॉक्टरों ने महिला की बच्चेदानी निकालने की बात भी कही और आनन-फानन में सहमति पत्र (कोरे कागजों) पर हस्ताक्षर करवा लिए।
शाम को करीब सात बजे वंदना का दूसरा ऑपरेशन किया गया और रात करीब नौ बजे उसे आईसीयू (ICU) में शिफ्ट कर दिया गया। पीड़ित परिवार लगातार उसकी स्थिति जानने की कोशिश करता रहा, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें दूर रखा। आखिरकार, रात करीब एक बजे डॉक्टरों ने परिजनों को सूचित किया कि वंदना देवी की भी मौत हो चुकी है।
खून और दवाओं के नाम पर ₹14,000 से अधिक की अवैध वसूली का आरोप
मृतका के पति विपिन कुमार ने अस्पताल प्रबंधन पर बेहद गंभीर और संगीन आरोप लगाए हैं। का कहना है कि इलाज के नाम पर अस्पताल की ओर से अलग-अलग चरणों में रुपयों की भारी मांग की जा रही थी। ब्लीडिंग का बहाना बनाकर खून का इंतजाम करने के नाम पर उनसे करीब 14 हजार रुपये नकद ले लिए गए। इसके अलावा आईसीयू चार्ज और जीवन रक्षक दवाओं के नाम पर भी अलग से मोटी रकम वसूल की गई। परिजनों का आरोप है कि मोटी रकम ऐंठने के बावजूद डॉक्टरों ने प्रसूता की जान पर ध्यान नहीं दिया और लगातार लापरवाही बरतते रहे।
हाईवे पर लेट गईं महिलाएं, प्रशासन के फूले हाथ-पांव
एक ही रात में जच्चा और बच्चा दोनों की मौत की खबर मिलते ही अस्पताल के बाहर ग्रामीणों और परिजनों का हुजूम इकट्ठा हो गया। देखते ही देखते आक्रोशित लोगों ने प्रयागराज-गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया। इंसाफ की मांग को लेकर परिवार की कई महिलाएं और बुजुर्ग सड़क के बीचों-बीच लेट गए। देखते ही देखते राष्ट्रीय राजमार्ग पर दोनों तरफ वाहनों का दो किलोमीटर लंबा चक्काजाम लग गया।
मामले की गंभीरता और हाईवे जाम होने की सूचना मिलते ही उतरांव थाना पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और शांत कराने का काफी प्रयास किया। परिजनों की मांग थी कि जब तक दोषी डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक वे जाम नहीं खोलेंगे।
पुलिस जांच और अस्पताल का रुख
काफी देर तक चली मान-मनौव्वल और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के लिखित आश्वासन के बाद परिजनों ने साढ़े चार घंटे बाद हाईवे से जाम हटाया। पुलिस ने राहत की सांस लेते हुए यातायात को सुचारू कराया और दोनों शवों को पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी।
दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम और परिजनों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर फिलहाल अस्पताल प्रबंधन की तरफ से कोई भी आधिकारिक पक्ष या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। पुलिस मामले की गहनता से छानबीन कर रही है और स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम भी अस्पताल के लाइसेंस और बुनियादी सुविधाओं की जांच में जुट गई है।

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