प्रयागराज: भिऊरा गांव में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन, उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़

(Sanvariya Times)
✍️ By: Suresh Chandra
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प्रयागराज के सैदाबाद (भिऊरा) में आयोजित दिव्य श्रीमद्भागवत कथा में व्यासपीठ से उपदेश देते पूज्य आचार्य श्याम जी महाराज। (सांकेतिक चित्र/File Photo)

प्रयागराज (सैदाबाद)।
संगम नगरी प्रयागराज की पावन धरा हमेशा से ही अध्यात्म, धर्म और संस्कृति का मुख्य केंद्र रही है। इसी पावन परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जनपद के सैदाबाद विकास खंड के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक ग्राम भिऊरा में इन दिनों दिव्य श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का एक बेहद भव्य और भक्तिमय आयोजन किया जा रहा है। इस धार्मिक अनुष्ठान के दूसरे दिन कथा पंडाल में आस्था का एक अभूतपूर्व सैलाब देखने को मिला, जहाँ आस-पास के दर्जनों गांवों से आए बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। पूरा कथा परिसर 'जय श्री कृष्णा' और 'राधे-राधे' के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा, जिससे संपूर्ण क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह से वैराग्य और भक्ति के रस में सराबोर नजर आया।
पूज्य आचार्य श्याम जी महाराज के भजनों पर झूमे श्रद्धालु
भिऊरा गांव में आयोजित इस सात दिवसीय ज्ञान यज्ञ के व्यासपीठ पर विराजमान प्रख्यात कथा वाचक पूज्य आचार्य श्याम जी महाराज ने अपनी सुमधुर वाणी से कथा के दूसरे दिन के प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक और सजीव वर्णन किया। कथा के दौरान आचार्य श्री द्वारा प्रस्तुत किए गए भक्तिमय और प्रेरणादायक भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमने और नृत्य करने पर मजबूर हो गए।
ग्रामीणों ने बताया कि इस कथा को लेकर पिछले कई हफ्तों से तैयारियां चल रही थीं, और बरिया तारा, सैदाबाद तथा हंडिया मार्ग से जुड़े कई अन्य इलाकों के श्रद्धालु भी प्रतिदिन यहाँ भगवान की दिव्य लीलाओं का रसपान करने पहुँच रहे हैं। पंडाल में सुरक्षा, स्वच्छता और बैठने की उत्तम व्यवस्था आयोजकों द्वारा की गई है ताकि दूर-दराज से आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य: काम, क्रोध और लोभ से मुक्ति
व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पूज्य आचार्य श्याम जी महाराज ने मनुष्य जीवन की सार्थकता और इस नश्वर संसार में मानव जन्म के वास्तविक उद्देश्य पर बहुत ही गहनता से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के इस आधुनिक और भौतिकवादी युग में इंसान केवल धन-दौलत, जमीन-जायदाद और सांसारिक सुख-सुविधाओं को ही जीवन का अंतिम लक्ष्य मान बैठा है, जो कि सरासर भ्रामक है। मनुष्य जीवन का असली उद्देश्य केवल इन क्षणभंगुर सांसारिक सुखों को भोगना नहीं है, बल्कि इस मायारूपी संसार के बंधनों से मुक्त होकर परमात्मा की प्राप्ति करना है।
आचार्य श्री ने आगे विस्तार से समझाते हुए कहा कि सनातन धर्म के शास्त्रों के अनुसार, मानव शरीर बेहद दुर्लभ है। यह जीवात्मा को लख चौरासी (84 लाख) योनियों के कठिन चक्र और बंधनों से मुक्ति प्राप्त करने के लिए एक स्वर्णिम अवसर के रूप में प्राप्त होता है। यदि मनुष्य इस जीवन में आकर भी ईश्वर की भक्ति नहीं करता, तो वह पुनः उसी जन्म-मरण के चक्र में फंस जाता है। उन्होंने भक्तों को सीख देते हुए कहा कि मानव जीवन की सच्ची सार्थकता तभी संभव है जब मनुष्य अपने भीतर छिपे काम, क्रोध, मद, मोह और लोभ जैसे विकारों से पूरी तरह दूर होकर स्वयं को पूरी ईमानदारी के साथ भगवान के चरणों में समर्पित कर दे।
कथा श्रवण से शांत होता है मन, मिटते हैं सारे कष्ट
कथा के महत्व पर चर्चा करते हुए व्यास जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मात्र करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं और अशांत मन को परम शांति की अनुभूति होती है। संसार की हर समस्या का समाधान और जीवन जीने की कला भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उपदेशों में समाहित है।
कथा के दूसरे दिन के प्रसंगों की समाप्ति पर मुख्य यजमान सहित उपस्थित विशिष्ट अतिथियों द्वारा श्रीमद्भागवत आरती उतारी गई और भगवान को दिव्य छप्पन भोग लगाकर उपस्थित हज़ारों श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। आयोजक समिति के सदस्यों ने बताया कि आने वाले दिनों में कथा के अंतर्गत भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव (नंदोत्सव), गोवर्धन पूजा, छप्पन भोग और रुक्मणी विवाह जैसे अत्यंत मनमोहक प्रसंगों का सजीव मंचन किया जाएगा, जिसे लेकर क्षेत्र के धर्मप्रेमियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

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