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| संजू देवी यादव। (सांकेतिक चित्र/File Photo) |
अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर जब देश का कोई एथलीट तिरंगे का मान बढ़ाता है, तो पूरे देश का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। लेकिन जब वही होनहार खिलाड़ी देश की सरजमीं पर वापस लौटता है और सिस्टम की बेरुखी का शिकार होता है, तो हर खेल प्रेमी का दिल टूट जाता है। ऐसा ही एक बेहद भावुक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। एशियन गेम्स (Asian Games) में भारतीय महिला कबड्डी टीम के साथ स्वर्णिम इतिहास रचकर देश का मान बढ़ाने वाली छत्तीसगढ़ की बेटी संजू देवी यादव की एयरपोर्ट से आई एक तस्वीर ने खेल प्रशासन और पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फूलों की माला पहने खुद सामान की ट्रॉली खींचती नजर आईं देश की बेटी
संजू देवी यादव ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर न सिर्फ भारत बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और अपने गृह जिले कोरबा का नाम रोशन किया। एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर जब वह स्वदेश लौटीं, तो एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए शुरुआती प्रोटोकॉल तक नदारद दिखा। जिस खिलाड़ी के स्वागत में पलक-पावड़े बिछाए जाने चाहिए थे, वह गले में फूलों की मालाएं पहने अपने ही भारी-भरकम सामान की ट्रॉली को खुद अकेले खींचती हुई नजर आईं।
यह दृश्य सोशल मीडिया पर आते ही आग की तरह फैल गया। लोगों का कहना है कि यह तस्वीर सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि खेल संघों और प्रशासनिक तंत्र की उस घोर लापरवाही की कहानी बयां करती है, जो मेडल आने पर श्रेय लेने तो सबसे आगे रहते हैं, लेकिन जमीन पर खिलाड़ियों को बुनियादी सम्मान देने में भी पीछे छूट जाते हैं।
बाद में जागा प्रशासन: 51 लाख रुपये की सम्मान राशि और भव्य अभिनंदन
एयरपोर्ट पर हुए इस शुरुआती सूनेपन और सोशल मीडिया पर जनता का गुस्सा फूटने के बाद, प्रशासन और समाज की नींद टूटी। इसके बाद गृह राज्य छत्तीसगढ़ पहुंचने पर संजू देवी यादव का भव्य नागरिक अभिनंदन किया गया। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से खिलाड़ी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि को सराहते हुए 51 लाख रुपये की सम्मान राशि का चेक सौंपा गया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। स्थानीय स्तर पर भी लोगों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका जोरदार स्वागत कर बेटी का हौसला बढ़ाया।
जनता ने उठाए कड़े सवाल: क्या मेडल वीरों के लिए ऐसा ही है हमारा सिस्टम?
भले ही बाद में संजू देवी यादव को पुरस्कार और सम्मान दे दिया गया हो, लेकिन इंटरनेट पर खेल प्रशंसक और आम नागरिक खेल मंत्रालयों और अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। नेटिजन्स का कहना है कि जो खिलाड़ी दिन-रात एक करके, पसीना बहाकर देश का स्वाभिमान और तिरंगे की शान वापस लाते हैं, क्या उनके स्वागत के लिए एयरपोर्ट पर सिस्टम के पास पहला कदम बढ़ाने का वक्त नहीं था? खिलाड़ी सिर्फ एक मेडल लेकर नहीं लौटते, वे अपने साथ पूरे देश का गौरव लेकर आते हैं। ऐसे में स्वागत के वक्त इस तरह का अकेलापन और बदइंतजामी देश के अन्य उभरते हुए एथलीट्स के मनोबल को तोड़ने का काम करती है।

