हंडिया: डिजिटल क्रांति के दावों के बीच साइबर फ्रॉड पर घिरे युवा, आशीष पांडेय ने पीएम से पूछे सीधे सवाल

(Sanvariya Times)
✍️ By: Suresh Chandra
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प्रयागराज। देश में चल रही डिजिटल क्रांति और तकनीक को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के दावों के बीच अब जमीनी हकीकत को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रयागराज के हंडिया विधानसभा क्षेत्र के युवा नेता आशीष पांडेय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक हालिया बयान को सोशल मीडिया पर कोट करते हुए देश के युवाओं की गंभीर समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है। आशीष पांडेय का कहना है कि जहां एक तरफ सरकार 'लास्ट माइल डिलीवरी' और 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ देश का आम युवा साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन जुए के बढ़ते जाल में फंसकर आर्थिक रूप से पंगु हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की है कि केवल तकनीक के विस्तार से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी सरकार की ही प्राथमिक जिम्मेदारी है।
पीएम मोदी ने जीएसएमए (GSMA) बोर्ड के सामने रखी थीं बातें
दरअसल, यह पूरा मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस सोशल मीडिया पोस्ट के बाद गरमाया, जिसमें उन्होंने जीएसएमए (GSMA) बोर्ड के सदस्यों के साथ हुई अपनी उच्चस्तरीय बैठक की जानकारियों को साझा किया था। नई दिल्ली के सेवा तीर्थ में हुई इस बैठक में प्रधानमंत्री ने डिजिटल क्षेत्र में भारत की प्रगति का रोडमैप रखा। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा था कि तकनीक का लाभ समाज के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति को मिलना चाहिए (Technology for the last mile)। इसके साथ ही उन्होंने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने, ग्लोबल साउथ के लिए सस्ती तकनीक उपलब्ध कराने, एआई (AI) और डीपफेक के खतरों की पहचान करने और साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए तकनीक-आधारित समाधान खोजने की बात कही थी।
युवा नेता आशीष पांडेय का तीखा पलटवार: "कहाँ है युवाओं की सुरक्षा?"
आशीष पांडेय ने अपने बयान में आगे लिखा कि जिस तकनीक के माध्यम से युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होने चाहिए थे, वह आज उनके लिए एक बड़ा मानसिक और आर्थिक संकट बनती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की लचर साइबर सुरक्षा नीतियों के कारण न तो आम युवाओं की मेहनत की गाढ़ी कमाई सुरक्षित है और न ही इस डिजिटल सिस्टम पर उनका भरोसा बच पाया है। युवा नेता ने बेहद आक्रामक लेकिन मर्यादित लहजे में सीधे देश के प्रधान से इन समस्याओं का जवाब देने की मांग की है।
साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन गेमिंग का बढ़ता ग्राफ चिंता का विषय
हंडिया क्षेत्र में भी हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के युवा ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी वाले ऐप्स और फर्जी लोन ऐप्स के झांसे में आकर लाखों रुपये गंवा चुके हैं। आशीष पांडेय के इस बयान को स्थानीय युवाओं का भारी समर्थन मिल रहा है। क्षेत्र के युवाओं का कहना है कि रोज़गार के सीमित अवसरों के बीच जब युवा इंटरनेट का रुख करता है, तो वहां वित्तीय धोखाधड़ी करने वाले गिरोह घात लगाए बैठे रहते हैं। ऐसे में सरकार को इन ऐप्स और साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कानूनी और तकनीकी कदम उठाने चाहिए, ताकि डिजिटल इंडिया का सपना असल मायनों में सुरक्षित हो सके।
कानूनी और तकनीकी मोर्चे पर सरकार को घेरने की तैयारी
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आशीष पांडेय द्वारा उठाया गया यह मुद्दा पूरी तरह से जनता और युवाओं से जुड़ा हुआ है। इसमें किसी भी तरह की व्यक्तिगत टिप्पणी के बजाय सरकार की नीतियों और डिजिटल सुरक्षा की खामियों को निशाना बनाया गया है। आशीष पांडेय ने साफ किया है कि जब तक देश के अंतिम व्यक्ति की डिजिटल सुरक्षा पुख्ता नहीं हो जाती, तब तक 'लास्ट माइल डिलीवरी' के दावे सिर्फ कागज़ी बातें बनकर रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं के हक और उनकी आर्थिक सुरक्षा के लिए वे इस मुद्दे को हर स्तर पर उठाना जारी रखेंगे।

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