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| प्रयागराज के प्रस्तावित सलोरी-हेतापट्टी सेतु का एक एआई-जनरेटेड काल्पनिक चित्र (AI-Generated Creative Representation) | केवल सांकेतिक उद्देश्य के लिए। |
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के निवासियों और यहाँ से होकर गुजरने वाले लाखों मुसाफिरों के लिए बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के मोर्चे पर एक बहुत ही शानदार और बड़ी राहत देने वाली खबर सामने आई है। शहर के यातायात को एक नई रफ्तार देने और जाम की समस्या से हमेशा के लिए निजात दिलाने के लिए सलोरी-हेतापट्टी सेतु का निर्माण कार्य इसी महीने शुरू होने जा रहा है। यह महत्वाकांक्षी पुल सीधे तौर पर शहर को राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (प्रयागराज-वाराणसी मार्ग) से जोड़ेगा, जिससे आने वाले समय में पूर्वांचल की राह बेहद आसान हो जाएगी।
सेतु निगम की तैयारियां पूरी, जलस्तर घटने का इंतजार
उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम ने इस बड़े प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए अपनी सभी प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली हैं। वर्तमान में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ा होने की वजह से पिलर और नदी के भीतर का मुख्य काम शुरू नहीं हो सका है।
हालांकि, विभागीय अधिकारियों का अनुमान है कि अगले 20 दिनों के भीतर जैसे ही गंगा नदी का जलस्तर सामान्य स्तर पर आ जाएगा, वैसे ही पुल के निर्माण का काम युद्धस्तर पर प्रारंभ कर दिया जाएगा। भारी मशीनों और तकनीकी टीमों को साइट पर तैनात करने की रूपरेखा तैयार कर ली गई है।
₹952.93 करोड़ का प्रोजेक्ट, पहली किस्त से सोइल टेस्टिंग पूरी
यह परियोजना प्रयागराज के इतिहास में सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजनाओं में से एक है। इस पूरे सलोरी-हेतापट्टी सेतु प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत 952.93 करोड़ रुपये तय की गई है।
परियोजना की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन द्वारा 20 जनवरी को ही इसके निर्माण के लिए 300 करोड़ रुपये की पहली किस्त आधिकारिक रूप से जारी की जा चुकी है। बजट मिलते ही शुरुआती चरण के तहत मृदा परीक्षण (सोइल टेस्टिंग) का काम बेहद बारीकी से पूरा कर लिया गया है, ताकि पुल की नींव को मजबूती दी जा सके।
3.6 किलोमीटर लंबा पुल कम करेगा शास्त्री पुल का भारी दबाव
इस नए पुल की कुल लंबाई 3.6 किलोमीटर होगी। वर्तमान समय में प्रयागराज से वाराणसी या भदोही की तरफ जाने वाले वाहनों को पुराने शास्त्री पुल से होकर गुजरना पड़ता है, जिसकी वजह से वहां अक्सर लंबा और थका देने वाला ट्रैफिक जाम लग जाता है। इस नए और आधुनिक 3.6 किमी लंबे पुल के बन जाने से पुराने शास्त्री पुल पर गाड़ियों का और यातायात का भारी दबाव लगभग आधा हो जाएगा, जिससे शहर के आंतरिक रास्तों को भी सांस लेने की जगह मिलेगी।
ढाई साल में पूरा होगा लक्ष्य, पूर्वांचल और बिहार जाने वालों को सबसे बड़ा फायदा
सेतु निगम और शासन ने इस पूरे प्रोजेक्ट को आगामी ढाई साल (30 महीने) के भीतर पूरी तरह से तैयार कर जनता को समर्पित करने का कड़ा लक्ष्य तय किया है।
इस पुल के पूरी तरह क्रियाशील हो जाने के बाद भदोही, वाराणसी, जौनपुर, बिहार और संपूर्ण पूर्वांचल की ओर यात्रा करने वाले आम यात्रियों और व्यावसायिक वाहनों को सबसे सीधा फायदा पहुंचेगा। इससे न केवल संगम नगरी प्रयागराज का ट्रैफिक सिस्टम बेहद सुचारू और आधुनिक हो जाएगा, बल्कि यात्रियों के कीमती समय और ईंधन दोनों की भारी बचत होगी।

